Tuesday, July 28, 2026

हार जीत

 छूट गया, टूट गया एक सपना हमने जो देखा था ,

चांद तक क्यों नहीं पहुंचा, जो पत्थर हमने फेंका था?


वो बेहतर थे, या हम कम पड़ गए?

या,  हमारी जीत और हमारी हार आपस में ही लड़ गए?


खैर, 

जब वो नहीं हारे हौसले, हर बार हमसे हार के,

क्या हम रुक जाएंगे, बस एक बार की मार से ?


फिर चमकेंगे आसमान में, एक दिन बन के सूरज हम,

रोक सकेगा कोई हमे, क्या, इतना किसमे होगा दम?


आज तो बस किस्मत की बाजी, जीते है हमसे मिल कर सब,

अगले खेल में दिखा ही देंगे...सबसे आगे होंगे हम।

No comments: