क्या सीखूं किसी और से, आपने सब सिखलाया है,
क्या सच्चा है क्या झूठा है, यह भी तो बतलाया है।
और कभी जो भटक गया मैं राह में चलते चलते तो,
सीधे रस्ते कैसे जाऊं, आपने ही दिखलाया है।
क्या सीखूं किसी और से, आपने सब सिखलाया है...
डरना सबसे छोड़ दिया, सिर पर जो आपका साया है,
नमन हूं करता आपको हर पल, साथ आपका पाया है।
रुकना मतलब हार नहीं है, आपने ये समझाया है,
हार मान के रुक ना जाना यह भी तो समझाया है।
क्या सीखूं किसी और से, आपने सब सिखलाया है...
रोने की जब टीस उठी तो आपने मुझे हंसाया है,
जंग लगा जो मुझको जब भी, आपने ही चमकाया है।
मैं तो धरती पर ही गुम था, आपने सूर्य बनाया है,
साधारण से बंदे को देखो तारों में दमकाया है।
क्या सीखूं किसी और से, आपने सब सिखलाया है...
Happy Teacher's Day🙏🏻

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